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बिहार में महंगाई की समस्या

बिहार की समस्या · ब्लॉग 02

बेरोज़गारी — नौकरी नहीं मिली, तो दिल्ली-मुंबई चले गए

✍️ हम पूर्णिया वाला · मार्च 2026 · 7 मिनट पढ़ें
पूर्णिया के बाईसी ब्लॉक में जाइए — वहां के ज़्यादातर घरों में कमाने वाला मर्द नहीं मिलेगा। वो दिल्ली में है, मुंबई में है, गुजरात में है। घर में बस बूढ़े माँ-बाप और बच्चे। यही है बिहार की बेरोज़गारी का असली चेहरा।

बिहार में नौकरियां हैं — लेकिन बिहार में नहीं। यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यही सच है। बिहार का पढ़ा-लिखा युवा देश के बाकी हिस्सों को चला रहा है — और खुद अपने घर के लिए तरस रहा है।

📊 रोज़गार के आंकड़े

💼 बिहार की प्रति व्यक्ति आय ₹53,478 (2022-23) — देश में सबसे कम।

🏭 बिहार की manufacturing में हिस्सेदारी सिर्फ 1.5%

🚌 पूर्णिया के बाईसी ब्लॉक से अधिकांश परिवार पलायन कर चुके हैं।

👩 बिहार में महिला रोज़गार दर सिर्फ 30.5% — राष्ट्रीय औसत 41.7%।

कारखाने क्यों नहीं आए बिहार में?

आज़ादी के बाद जब देश में उद्योग लगाए गए, तो Freight Equalization Policy के कारण बिहार के कच्चे माल का फायदा दूसरे राज्यों को मिला। 2000 में झारखंड अलग हुआ तो बिहार का सारा खनिज, सारा उद्योग चला गया। बिहार के पास बची तो सिर्फ आबादी और खेती।

आज बिहार में बिजली अविश्वसनीय है, सड़कें कमज़ोर हैं, कुशल मज़दूर पलायन कर चुके हैं — इसलिए कोई बड़ा निवेशक यहां आना नहीं चाहता। और जब निवेश नहीं — तो नौकरी नहीं।

मैंने B.A. किया, फिर भी तीन साल तक कोई नौकरी नहीं मिली। आखिर में दिल्ली जाना पड़ा। वहां एक कारखाने में काम करता हूं। ₹12,000 मिलते हैं। घर भेजता हूं ₹8,000। खुद ₹4,000 में दिल्ली में रहता हूं। यह ज़िंदगी है। — पूर्णिया के एक प्रवासी मज़दूर की बात

युवाओं का सपना और हकीकत

बिहार के युवाओं में पढ़ने की ललक है। UPSC, BPSC, रेलवे — हर परीक्षा में लाखों बिहारी बच्चे बैठते हैं। लेकिन सीटें कितनी हैं? सौ, हज़ार। और आवेदक लाखों। जो नहीं चुने जाते — उनके लिए बिहार में कुछ नहीं।

Private sector भी कमज़ोर है। IT company नहीं, manufacturing नहीं, tourism नहीं। बिहारी युवा या तो सरकारी नौकरी के इंतज़ार में बैठे हैं या पलायन कर गए हैं।

✅ रास्ता क्या है?

🏭 गया, पटना, दरभंगा में industrial hub बनाए जाएं।

🌾 कृषि प्रसंस्करण उद्योग — मखाना, लीची processing बिहार में हो।

💻 IT और skill training केंद्र ज़िला स्तर पर खोले जाएं।

🏗️ निर्माण कार्यों में स्थानीय मज़दूरों को प्राथमिकता दी जाए।

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